Oppenheimer Movie Story In Hindi: Oppenheimer Movie Review Hindi

क्रिस्टोफर नोलन कि यह फिल्म ‘ओपेनहाइमर’ एक बायोपिक फिल्म हैं, जो कि दुनिया का सबसे पहले परमाणु बम बनाने वाले डॉक्टर जे. रॉबर्ट ओपेनहाइमर कि जिंदगी कि सच्ची कहाँनी हैं, जो इस फिल्म में दिखाई गई हैं। यह कहाँनी दुसरी विश्व युध (Second word war) समय कि हैं,आइये हम उनकी पुरी कहाँनी जानते हैं।

फिल्म कि सुरूआत होती हैं, एक बम धमाके से होती है जिसकी ऊचाई लघभग 30 फिट ऊची होगी, फिर दिखाया जाता हैं, कि डॉक्टर जे. रॉबर्ट ओपेनहाइमर (एक्टर किलियन मर्फी) एक इंट्रोगेशन रुम मे बैठे हुये हैं, जिनके सामाने करीब 8 लोग बैठे हुये हैं, उनसे सवाल जाबाब कर रहे हैं, कि आप अमेरिका छोर कर क्यो गये थे, जे. रॉबर्ट ओपेनहाइमर ने कहा, कि मै मौर्ड्न फिजिक्स पढ्ना चाहता था।

अ‍ॅफिसर पुछे क्या ये यहाँ नही हो सकता था, मैने सुना हैं, बौबलिक थिरियोटिकल डिपार्ट्मेंट काफी जाना माना हैं,ओपेनहाइमर कहते हैं,जी हाँ वह मेरा ही बनाया हुआ हैं, लेकिन पहले युरोप जाना जरुरी था, मैं पैट्रिक ब्लैकेट के निचे पढाई करने गया था। अ‍ॅफिसर कहे क्या आप वहाँ बहुत खुश थे। ओपेनहाइमर-हाँ बहुत ज्यादा मुझे घर कि याद आ रही थी।

Oppenheimer Movie Cast

  • कलाकार: किलियन मर्फि, रॉबर्ट डाउनी जूनियर, एमिली ब्लंट, मैट डैमन, फ्लोरेंस पघ, केसी एफ्लेक, जोश हार्टेट, केनेथ ब्रानाघ, और रामी मलेक आदि
  • लेखक: क्रिस्टोफर नोलन
  • निर्देशक: क्रिस्टोफर नोलन
  • निर्माता: चार्ल्स रोवेन, एम्मा थॉमस, और क्रिस्टोफर नोलन
  • रिलीज डेट: 21 जुलाई 2023

Oppenheimer Movie Trailer

यहाँ पर आप Oppenheimer Movie की Trailer को online देख सकते हैं।


Oppenheimer Movie Story

यह उस समय कि बात जब ओपेनहाइमर विद्यार्थी थे,उस समय इंसटियुट मे पढाई करते साथ मे लेबोरेट्रि के लैब में काम भी सिख रहा थे।

इसी के साथ ओपेनहाइमर अपनी पुराने यादो मे जाता हैं, जहाँ वह रात को सोते वक्त उसकी यादो मे एक छुपा हुआ ब्रहमांड को देखकर परेसान हो जाता हैं। फिर सुबह के समय लेबोरेट्रि मे एक्स्पेरिमेंट करते समय हैं, उसके हाथ से एक कांच का बोतल गिर कर टुट जाता हैं, जिससे उसका एक्स्पेरिमेंट खराब हो जाता हैं,उसका प्रोफेसर उसे कहता हैं,तुम्हारी निंद पुरी नही हुई हैं ओपेनहाइमर ,फिर से करो। ओपेनहाइमर कहता हैं, मुझे लेक्चर के लिए जाना हैं। निल्स बोहर का लेक्चर हैं सर। उस वक्त लैब में और भी विद्यार्थी थे।

प्रोफेसर कहता हैं, अरे मै तो भुल ही गया था चलो चले, तुम नही ओपेनहाइमर तुम ये सब साफ करोगे। उसका प्रोफेसर इसी तरह उसे परेसान करते रहता हैं, छोटी-छोटी बातो के लिए परेसान करता रहता हैं, उसे बिल्कुल पसंद नही करता हैं। इसलिए ओपेनहाइमर इस सब से परेसान हो कर वो अपने प्रोफेसर को मारना भी चाहता हैं। लैब को साफ करते समय उसे एक जहर कि छोटी सी बोतल रैक मे रखी हुई नजर आती हैं।

फिर क्या उस जहर को वो इंजेक्सन मे भरकर प्रोफेसर के टेवल पर रखी सेब के अंदर इंजेक्ट कर देता हैं, उसके बाद वो लेक्चर के लिए चला जाता हैं। निल्स बोहर लेक्चर में सब को बोल रहे हैं, कोंअटम फिजिक्स कोई नई खोज नही हैं, ये बस असलिअत समझने का नया तरीका हैं। अल्बर्ट आइंस्टाइन ने हमारे लिए दरवाजा खोला था,और अब हम अंदर झाकर हमारी दुनिया को करीब से देख रहे हैं, ऊर्जा और विरोद से भरी दुनिया जिसे सिऊकारना सब कि बस कि बात नहीं हैं।

लेक्चर खत्म होने के बाद ओपेनहाइमर घर आ जाता हैं, रात को सोते समय उसे फिर से छुपा हुआ ब्र्हमांड दिखाई देता हैं, जिसमे लखो तारे एक साथ नजर आते हैं, जो एक दुसरे से जुरा हुआ हैं, साथ में एक लाईट का गोल सर्कल नजर आता हैं, जो बहुत तेजी से गोल-गोल एक सर्कल में घुम रहे हैं, साथ में टिम-टिमाते हुए तारे में कई तारे निचे गिर रहे हैं, वो गिरते ही आग कि तरह जलने लगता हैं, वो तारे जलते-जलते निचे कि ओर गिरने लगता हैं।

उसी के साथ ओपेनहाइमर कि निंद खुल जाती हैं, वो दौडते हुए लबोरेट्रि के अ‍ॅफिस में आता हैं, वहाँ पर उसके प्रोफेसर के साथ निल्स बोहर भी नजर आते हैं, जो पिछ्ले दिन लेक्चर के लिए आए थे,वो लोग एक दुसरे से बात कर रहे थे। ओपेनहाइमर के वहाँ आते ही प्रोफेसर कहते हैं, यही मेरा स्टुडेंट हैं, जो कल आपसे सवाल पुछ रहा था।

निल्स बोहर ओपेनहाइमर से कहते हैं, लेक्चर के समय तुमने अच्छा सवाल पुछा था, प्रोफेसर कहे- इसके सुज-बुज पर कोई सक नही हैं, बस इसके लैब में काम करने के तरिके में सुधार आनी चाहिए। ओपेनहाइमर पुछ्ता हैं,कि आप हारवड में गये थे, निल्स बोहर कहे- तुमने यही सवाल पुछा था, फिर से क्यो पुछ रहे हो। ओपेनहाइमर कहाँ- मुझे आपका जवाब अच्छा नही लगा।

निल्स बोहर कहे- क्या तुम्हे कल का जवाब अच्छा लगा, ओपेनहाइमर कहाँ काफी ज्यादा, निल्स बोहर बोले भविश्य के कोई खतरे को बिना जाने अपना एक कदम आगे बढा देना चाहिए। लगता हैं तुम तैयार हो, सायद तुम्हे लैब में काम करना पसंद नहीं, तुम कैब्रिज के बिकर और सेलेव्शन कि दुनिया छोड कर ऐसी जगह जाओ, जहाँ तुम्हे वो सोचने दे- कहाँ गोटेंगन बोर्न के पास।

जर्मनी जाओ मैक्स बोर्न के निचे पढाई करो, और थियोरी को अच्छी तरह समझो, मै ऊनसे बात कर लुंगा, ये कहते हुये निल्स बोहर टेबल पर रखा सेब ऊठाकर जैसे ही खाने वाला था, ओपेनहाइमर सेब छिन कर ड्सविन मे फैक देता हैं, और कहेता हैं किरा हैं इसमे, निल्स बोहर बोले अच्छा तुम्हारा बैच कैसा हैं, प्रोफेसर बोले उस थिजिय्स के लेवन का नही जो वो बनना चाहता हैं। निल्स बोहर बोले अल्जेवरा मियुजिक के सुरो जैसा हैं, ये जरुरी नही कि तुम पढ सकते हो, बल्कि क्या तुम मियुजिक सुन सकते हो, रॉबर्ट ओपेनहाइमर हाँ मै सुन सकता हु।

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Oppenheimer Movie Story दुसरी तरफ

दुसरी तरफ ये दिखाया जाता हैं, कि एक ससंद के अंदर बहुत सारे लोग कोर्ट रुम कि तरह सुनवाई कर रहे हैं, जिसमे बहुत सारे बरे पद पर बैठे सरकारी अफसर लुविस स्ट्रॉस से पुछ-ताछ कर रहे हैं, लुविस स्ट्रॉस (एक्टर रॉबर्ट डाउनी जूनियर) हैं,जिसे हम आइरन मैंन के नाम से जानते हैं। जो इस फिल्म लुविस स्ट्रॉस के किरदार निभा रहे हैं।

लुविस स्ट्रॉस से पुछा जा रहा हैं, कि क्या आप डॉक्टर जे. रॉबर्ट ओपेनहाइमर के साथ आपके रिश्ते कैसे थे, क्या आप उनसे 1947 में मिले थे, लुविस स्ट्रॉस कहे हाँ बिल्कुल, ओफिसर पुछता हैं,तब आप ऐटोमिक ऐनर्जि के कमिसनर थे, लुविस स्ट्रॉस कहे हाँ, लेकिन मै ओपेनहाइमर से एक बोर्ड मेम्बर कि हैशियत से मिला था, इंस्टियुट औफ एडवांस स्ट्डि प्रिंसटन में। क्यो कि वो जंग के बाद महान फिजिस्यन के तौर पे मसुहुर हो चुका था, मैं चाहता था, कि वो हमरी इंस्टियुट कि जिमेदारी समाले।

Oppenheimer Movie Story लुविस स्ट्रॉस पास्ट टाईम

यह समय दुसरी विश्व युध के कई साल बाद का हैं, जब तक डॉक्टर जे. रॉबर्ट ओपेनहाइमर परमाणु बम बना चुके थे, जपान के हिरोशिमा और नागासाकि शहर पर बम गिराया भी जा चुका था, उसके कई साल बाद सन:1947 के वक्त…

लुविस स्ट्रॉस पिछले यादो मे जाते हैं, जहाँ वो पहली बार डॉक्टर जे. रॉबर्ट ओपेनहाइमर से मिलते हैं। लुविस स्ट्रॉस के घर के सामने एक कार आकर रुकती हैं, जसमे डॉक्टर जे. रॉबर्ट ओपेनहाइमर बाहर निकलते हैं। लुविस स्ट्रॉस हैंड सेक करते हुए बोले आपसे मिलकर खुशि हुई। मैं टेम्पल एमउलिअल का प्रेजिडेंट हू, मैरटन में साउथ के लोग मुझे स्ट्रॉस कहेकर बुलाते हैं।

खैर आपको इस इंस्टियुट में सुआगत हैं, मुझे लगता हैं कि आपको यहाँ बहुत अच्छा लगेगा, आपका घर सामने हैं। जहाँ आप अपनी पत्नी और अपने दो बच्चो के साथ रहेंगे। मैं आपका हुनर का बहुत बरा फैन हु, ओपेनहाइमर पुछा क्या आप भी एक फिजिस्यन हैं।ऐ लुविस स्ट्रॉस नही मै फिजिक्स किया और किसी सबजेक्ट कि ट्रेनिंग नही ली, मै एक सेल्फ्मैड मैन हू। ओपेनहाइमर कहे मैं समझ सकता हु मेरे पिता भी ऐसे ही थे।

लुविस स्ट्रॉस घर के अंदर जाते हुए कहे ये आपका ओफिस हैं, ओपेनहाइमर खिड्की से बाहर देखते हैं, बाहर तालाब के पास अल्बर्ट आइंस्टाइन खरे हैं,लुविस स्ट्रॉस बोले मुझे पता हैं कि वो अक्सर दोपर को यहाँ आते हैं, जानते हैं मै सोचता था,आपने ऊन्हे मैरेटन प्रोजेक्ट में सामिल क्यो नही किया। वो हमारे दौर के महान वैज्ञानिक थे। ओपेनहामर कहे हाँ, अपने दौर के आइंस्टाइन ने अपनी थियोरी औफ रिएलिविटि लगभग 40 साल पहले पबलिस कि थी। उन्हो ने जब कोअट्म दुनिया ऊजागर कि उसपर कभी काम नही किया।

लुविस स्ट्रॉस कहाँ ईश्वर कभी दाव नही खेलता, ओपेनहाइमर कहे बिलकुल सही कहाँ। ऐमिरल स्ट्रॉस कहे मै आपको उनसे मिलवाना चाहुंगा, ओपेनहाइमर बोले कोई जरुरत नही, मै उन्हे सालो से जानता हू। ओपेनहाइमर अल्बर्ट आइंस्टाइन से मिलने के लिए तालाब के पास गए, और उनके बिच कुछ देर तक बाते हुई, क्या बाते हुई, लुविस स्ट्रॉस को नही पता। लेकिन वो ये जानना चाहते थे, कि आखिर उन दोनो के बिच ऐसी क्या बाते हुई।

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जिसके बाद अल्बर्ट आइंस्टाइन ने लुविस स्ट्रॉस से कोई बाते भी नही कही और उनके तरफ देखा तक नही,और बिना कोई सवाल के जवाब दिए वहाँ से चले गए। लुविस स्ट्रॉस ओपेनहाइमर पुछते हैं, आपने उनसे क्या कहा, कि वो मुझसे बिना बाते किए यहाँ से चले गए, मुझे कोई जवाब भी नही दिए। ओपेनहाइमर बोले कुछ खाश नही,मिस्टर स्ट्रॉस मेरे अतित के कुछ ऐसे बाते हैं,जो आपको पता होना चाहिए।

लुविस स्ट्रॉस कहे वैसे मै AEC का चेअरमैन होने के नाते मैं आपका सिउक्रिटी फाईल पहले ही पढ चुका हु,ओपेनहाईमर बोले फिर भी ऐतराज नही। लुविस स्ट्रॉस कहे नही,आपने देश के लिए जो कुछ भी किया उसे देखते हुए मुझे क्या ऐतराज होगा।ओपेनहाईमर बोले वक्त बदलता हैं,मिस्टर स्ट्रॉस।

लुविस स्ट्रॉस कहे आपने ये इंसटियुट इसलिए बनाया, ताकि कुछ अलग सोचने वाले को एक मौका मिले जैसे कि आप, आप ही वह इंसान हैं, जो ये कर सकते हैं। ओपेनहईमर बोले ठिक हैं,तो मै कल आपसे AEC के मिटिंग मे मिलुंगा। लुविस स्ट्रॉस कहे याद रहे ये देश के सबसे सम्मानी औदो मे से एक हैं। ओपेनहाइमर बोले हाँ, घर भी पास, इसलिए मैं भी तैयार हू।

Oppenheimer Movie Review इस समय

ओफिसर बोले तो उन्हे अपौएंट करने से पहले ओपेनहाइमर ने अपने अतित के बारे में आपको बताया था,मिस्टर स्ट्रॉस… लुविस स्ट्रॉस कहे उस वक्त मैं यही सोच रहा था, कि ओपेनहाइमर ने अल्बर्ट आइंस्टाइन से क्या कहा ,कि वो मुझसे इस तरह नाराज हो गए। ओफिसर पुछे फिर बाद में क्या हुआ। लुविस स्ट्रॉस ने कहा वैसे बाद में क्या हुआ हम और आप सभी जानते हैं।

इस समय दुसरी तरफ ईंट्रोगेसन रुम में ओपेनहाईमर से पुछा जा रहा, जब आप युरोप में थे, तब आपकी मुलाकात और भी फिजिस्यन से हुई थी, क्या उसमे कोई रसईअन (रुस) इंसान थे।

Oppenheimer Movie Story Past Time

ओपेनहाईमर फिर से अपनी पुरानी यादो में जाते हैं, ये उस समय की बात हैं, जब ओपेनहाईमर खुद लेक्चरर बन गये थे, फिजिस्यन के तौर पर उनका कुछ हद तक नाम भी हो गया था। ओपेनहाईमर बोले गोटेंगन के बाद मैं हॉलैंड के लाईडन चला गया जहा मैं ईसिडोर रबी से पहली बार मिला, उसने मुझे बताया कि यहा एक जर्मन हैं, जिससे तुम्हे मिलना चाहिए। फिर ओपेनहाईमर वर्नर हाइजेनबर्ग से मिले। वर्नर हाइजेनबर्ग ओपेनहाईमर से कहा तुम्हारा औलिकेस वाला पेपर कमाल था, ओपेनहाईमर ने कहा वो आपसे प्रेरित था, इसलिए अच्छा लगा।

वर्नर हाइजेनबर्ग बोले फिर से ऐसा कुछ लिखो तो बताना साथ में लिखेंगे,ओपेनहाईमर बोले मुझे अब अमेरिका लौटना हैं, वर्नर हाइजेनबर्ग बोले क्या वहा कोअंटम थिओरी को सिरियसली लेने वाला कोई नही, ओपेनहाईमर बोले इसी लिए तो जाना हैं, फिर ओपेनहाईमर अमेरिका वापस आ गए। वापस आते ही उन्होने कैल्टैग और बर्किली दोनो जगह की पोस्टिंग ले ली। फिर उन्होने कोअंटम थियोरी की लेक्चर सुरु की और पढाने लगे।

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कोअंटम मैकेनिज के बारे में आप क्या जानते हैं, मान लिजिए कि एक स्टार हैं, स्पेस में कही दुर ये स्टार जल रही हैं, ये आग ग्रेवेटी के खिलाप बाहर ढ्केली जा रही हैं,लेकिन ये ठ्न्डा हो तो ये सिकुर जायेगी।और डेंसिटी बढ जायेगी, जिससे एक खतरनाक रि साईकिल बनेगा। वैसे इसकी लिमिट कितनी हैं, मुझे भी नही पता, देखते हैं,मैथ हमे कहा ले जाती हैं, मुझे यकिन हैं, आज तक वहा कोई नही गया होगा।

फिर ओपेनहाईमर एक पार्टि में गये, जहा पर उनसे बहुत सारे लोग मिले, उनके भाई और उसकी मंगेतर ये सब लोग रुस के एक पार्टि के अध्यक्ष थे। वो लोग चाहते हैं, कि ओपेनहाईमर उनकी पार्टि के सद्स्य बन जाए। वही पर ओपेनहाईमर एक लड़की से मिले जिसका नाम जिन हैं, फिर उसके बाद उनका रिश्ता आगे बढा, वो एक दुसरे से प्यार करने लगे।

ओपेनहाईमर एक खेत में जाते हैं,जिसको ओपेनहाईमर और उसके भाई ने मिलकर खरिदी थी,ओपेनहाईमर अपने भाई को पार्टि छोड्ने के लिए कहता हैं,क्यो कि वो दुसरे देश कि पार्टि हैं, जो बाद में उसके लिए खतरा हो सकता हैं, लेकिन उसका भाई नही मानता हैं। कुछ दिन बाद अखवार में एक न्युज आई, हैन और स्ट्रैसमैन जर्मनी में छा गए। क्योकि उन्होने एटोम नाम के एक आदमी को उसपर निउट्रोन कि बमबारी कर के,जिसे न्यूक्लियर फिजन कहते हैं।

ओपेनहाईमर कहते हैं, ये नामुमकिन हैं। ओपेनहाईमर एक थियोरी बनाता हैं, देखो नही हो सकता। उसका दोस्त कहता हैं,इसमे थोडी सी कमी हैं,पास में एल्व्रेज ने कर दिया। उसने एक फिजन पासेस बना दिया,ओपेनहाईमर वहा जाकर देखा और समझा इस प्रोशेस के दौरान कुछ और भी उतेजन न्यूट्रोन एटम को तोरने में काम आता हैं, यूरेनिम एटम्स जिसको चैन रिऐक्शन कहते हैं, दुनिया का जिस फिजिस्यन ये न्यूज देखी हैं,सब इस वक्त यही सोच रहे हैं, एक बम…

ओपेनहाईमर फिर से कौमनेस पार्टि में गये वहाँ किट्टी नाम कि लड़की से मुलाकात हुई, जो कौमनेस पार्टि के सद्स्य भी थी,उसके बाद दोनो में प्यार हुआ, और दोनो ने सादी कर ली, और उनके बच्चे भी हुए। उसके बाद वो ट्रेड यूनियन के बारे में लोगो को बताने लगा, उसके बाद ईंस्टियुट मे उसके साथ काम करने वाले कलिग लौरेंस ने कहाँ ये तुम क्या कर रहे हो,ओपेनहाईमर बोला ये ट्रेड यूनियन हैं। लौरेंस कहता हैं, जिसमे सारे के सारे कौमनेस लोग हैं। तुम उनके पार्टि और मिटिंग में जाना बंद करो।

जानते हो इसके कारन तुम्हे इस प्रोजेक्ट से हटाया जा सकता हैं। तुम्हे इस प्रोजेक्ट के बारे में कुछ भी पता हैं।ओपेनहाईमर कहा हम सब जानते हैं, अल्बर्ट आइंस्टाइन और सजिलर्ड ने खत लिखकर रौजवेल्ट को चेतावनी दि हैं। जर्मन बम बना सकते हैं। मुझे ये भी पता हैं, कि नजी के हाथ बम लगने से क्या हो सकता हैं। मैं क्या करता हू, उनको क्या,ये मेरी जिंदगी हैं। लौरेंस बोला तुम सिर्फ अपने लिए जरुरी नही हो, तुम देश के लिए जरुरी हो।

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Second World War का समय

कुछ समय बाद दुसरी विश्व युध (Second World War) का समय पुरी दुनिया जंग लड़ रही हैं। उस समय ओपेनहाईमर से आर्मी अफसर कर्नल ग्रोव्स मिलने आए, एक प्रोजेक्ट के लिडर कि खोज में, कर्नल ग्रोव्स कहते हैं, पुरी दुनिया भर में लड़ाईया चल रही हैं। मुझे यहाँ वशिंगटन में रुकना परेगा।ओपेनहाईमर पुछा क्यो, कर्नल ग्रोव्स बोले मैने एक पेंटोगोन बनाया था, रौज को वो इतनी पसन्द आई कि उन्होने मुझे मैनहैक्टन ईंजिनियर डिस्ट्रिक्ट कि जिमेदारी सौप दी।

इसलिए मैं प्रोजेक्ट डैरेक्टर कि खोज मे हू,ओपेनहाईमर कहाँ और उसमे मेरा नाम आ गया। कर्नल ग्रोव्स बोले आप अमेरिका में कौअंटम फिजिक्स लाये,इसलिए इसलिए मैं सोच में पड़ गया, फिर मैं यहाँ आया। यहाँ आकर पता चला कि आप एक अइआस दिल फेख किस्म के आदमी हैं, सायद एक कौमनेस भी,ओपेनहाईमर बोले क्या आप ने ये नही सुना कि वो ब्रिलिएंट हैं। कर्नल ग्रोव्स बोले आपके फिल्ड में ये आम बात हैं। आपको अब तक नोवेल पराइज क्यो नही मिला।

ओपेनहाईमर ने कर्नल ग्रोव्स कहा आप जनरल क्यो नही बने। कर्नल ग्रोव्स बोले सायद इस प्रोजेक्ट के बाद बन जाउ,ओपेनहाईमर ने कहा सायद मेरे साथ भी ऐसा हो जाए। कर्नल ग्रोव्स बोले बम बनाने के लिए नोवेल पराईज,ओपेनहाईमर ने कहा,एल्फर्ड नोवई ने डाईनामाईट कि खोज कि थी। कर्नल ग्रोव्स ओपेनहाईमर से बोले तो आपका पहला कदम क्या होता, ओपेनहाईमर बोले नाजी से पहले इस थियोरी को एक प्रेटिकल अटोमिक बम में बदलने कि बात कर रहे हैं।

कर्नल ग्रोव्स बोले जो 12 महिने पहले काम सुरु कर चुके हैं।ओपेनहाईमर बोले 18 महिने, कर्नल ग्रोव्स ये बात आपको कैसे पता चली। हमारे फास्ट न्यूट्रोन रिसर्च को 6 महिने लगते, जिसको उन्होने ने ये काम सौपा होगी, वह तुरंत समझ जायेगा। कर्नल ग्रोव्स पुछते हैं,उन्होने ये जिमेदारी किसको सौपी होगी। ओपेनहाईमर बोले वर्नर हाइजेनबर्ग उससे बेहतर अटोमिक टेक्चर समझने वाला इंसान मैंने आज तक नही देखा।

कर्नल ग्रोव्स पुछे आप उसका काम जानते हैं। ओपेनहाईमर बोले मैं उसे जानता हू, लम्बी रेस में जर्ममन जित जायेंगे। फिर भी एक उम्मिद हैं, एंटिसेवेटिसम… हिटलर कोअन्टम फिजिक्स को जुईव साईंस कहता हैं। उसने अल्बर्ट आइंस्टाइन को मुह पर ये बात कही थी। हिटलर वाकई नफरत में इतना अंधा हो चुका हैं, वह वर्नर हाइजेनबर्ग को सही रिसोर्स नही दिए। तो हम यही रिसोर्स अपने साईंटिस को दे तो उससे पहले हम कामयाब हो सकते हैं।

मैं ये मैनहैटन प्रोजेक्ट के लिए तैयार हू, उसके लिए हमे एक बहुत बरी जगह चाहिए। फिर ओपेनहाईमर कर्नल ग्रोव्स लोस एलमोस लेकर आते हैं। वहाँ बहुत सरी जगह खाली थी,मैनहैटन प्रोजेक्ट के लिए इससे अच्छी जगह हो ही नही सकती थी। क्यो कि ये जगह अमेरिका के रेलवे के चारो तरफ का मुख्य केंद्र था, जहाँ रिसोर्स को लाने में कोई दिक्कत नही होगी। ओपेनहाईमर कर्नल ग्रोव्स से बोले आपको यहाँ एक शहर बसाना हैं।

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कर्नल ग्रोव्स पुच्छे क्यो,ओपेनहाईमर बोले इसलिए क्योकि जो साईंटिस्ट और लोग काम करने वाले के साथ उसके परिवार के लोग नही होंगे,तो वह ठिक से मन लकाकर काम नही कर सकेंगे। क्योकि इस काम में कितना समय लगेगा मुझे भी नही पता,कई महिने या साल भी लग सकते हैं। फिर उसके बाद कर्नल ग्रोव्स ने वहाँ शहर बसाने का काम चालू कर दिया। वहाँ पर घर बनवाया गया, उसके साथ और भी चिजे बनाई गई जो आम शहर मे रोज मररा कि जिंदगी में काम आती हैं।

ऊसी के साथ मैनहैटन प्रोजेक्ट पर काम करने के लिए साईंटिस्ट और कई लोगो को लाया गया। कई साईंटिस्ट तो यहाँ आने से मना भी कर रहे थे, कि हम उस विरान सी जगह पर क्यो जाये, जहाँ पर कई महिने या कई साल लग सकते हैं। कर्नल ग्रोव्स बोले कि ये दुनिया के इतिहास कि सबसे बरी खोज होने वाली हैं। फिर उसके बाद कई साईंटिस्ट को अलग-अलग विभाग से ढूंढ-ढूढ कर लये गये,जो सभ किसी अपने-अपने काम में एक्स्पर्ट हैं,इन सभी को लिड कर रहे हैं, इस प्रोजेक्ट के लिडर ओपेनहाईमर…

इसके बाद काम सुरु किया गया, सभी को अपना-अपना काम दिया गया। इनमे से कई साईंटिस्ट काम छोर कर भी चले गये,उनका कहना था,कि हम बम बना रहे हैं।जो लोगो को मारने का काम करेगा। हम फिजिस्यन हैं, एक्स्पेरिमेंट करते हैं,रिसर्च करते हैं, ना कि लोगो को मारने का काम मैं ये काम नही कर सकता, मैं जा रहा हू, कई साईंटिस्ट चले भी गये। फिर भी और साईंटिस्ट के जरिये काम को आगे बढाया गया।

सब अपनी-अपनी थियोरी बना रहे थे, कोई कौलकुलेशन कर रहा था। तब टैलर अपनी थियोरी लेकर आता हैं,और कहेता हैं, जब मैं चैन रियक्शन कैलकुलेट किया, तो मुझे परेशानी में डालनी वाली समभावना दिखी। वहाँ पर सारे साईंटिस्ट वो पेपर देखने लगे,और एक-एक करके सभी ने वो कैलकुलेट कि हुई पेपर देखी,सभी ने ये कहा टैलर कि कैलकुलेशन सही नही हो सकती। फिर ओपेनहाईमर पेपर देखता हैं,और सभी से कहेता हैं,कैलकुलेट करो,मैं ईंस्टन होकर आता हू।

उनमे से एक पुछता है किसलिए, ओपेनहाईमर बोला अल्बर्ट आइंस्टाइन से बात करने। फिर वो कहेता हैं,तुम दोनो कि सोच बिल्कुल अलग हैं।ओपेनहाईमर बोला इसलिए ऊनकी राय जरुरी हैं। फिर वो अल्बर्ट आइंस्टाइन से मिलने ईंस्टन चला जाता हैं।वहाँ जाकर कैलकुलेट कि हुई पेपर अल्बर्ट आइंस्टाइन के हाथ देते हैं,अल्बर्ट आइंस्टाइन वो पेपर देखते हैं,और पुछते हैं ये किसका कैलकुलेशन हैं,ओपेनहाईमर बोला टैलर का,अल्बर्ट आइंस्टाइन पुछते हैं,तुम इसका क्या मतलब निकालते हो।

ओपेनहाईमर बोलते हैं,न्यूट्रोनस न्यूकिलियर से टकराते हैं,उस धमाके से बाकि न्यूकलियार से टकराने के लिए न्यूट्रोन आजाद होते हैं,प्रिटिकैलिटी वापस लौट नही सकते क्योकि वो बहुत शक्तिशाली फोर्स हैं, इसपर ये चैन रियेक्शन बिलकुल नही रुकता।अल्बर्ट आइंस्टाइन कहते हैं इससे बहुत बड़ा धमाका हो सकता हैं। ओपेनहाईमर बोले जब एटोमिक डिवाईज को डिटोनेक्ट करेंगे,सायद हम ऐसा चैन रियेक्शन सुरु कर दे, जो पुरी दुनिया खतम कर सकता हैं।

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अल्बर्ट आइंस्टाइन कहते हैं तो नौबत यहाँ तक आ गई।तुम कौअंटम वर्लड(world) के समभावनाओ में खो गये,और तुम चाहते हो इसका कोई हल निकल आए।ओपेनहाईमर अल्बर्ट आइंस्टाइन से कहते हैं,क्या आप एक बार कैलकुलेशन कर के देख सकते हैं।अल्बर्ट आइंस्टाइन बोले तुम में मुझ में बस एक बात कौमन हैं,हम दोनो मैथ (गणित) से नफरत करते हैं।अल्बर्ट आइंस्टाइन पुछते हैं,बर्कले में इसपर कौन काम कर रहा हैं।

ओपेनहाईमर बोले हाँस बेथे,अल्बर्ट आइंस्टाइन बोले तो वो सच बतायेगा।ओपेनहाईमर बोले अगर ये सच तबाही भरा निकला तो,अल्बर्ट आइंस्टाइन बोले तो काम बंद कर दो।और अभी ये सारी जानकारी नाजिस के साथ साझा करो,ताकि दोनो में से कोई भी दुनिया का अंत ना कर ले।ओपेनहाईमर वहाँ से जाने लगता हैं,तब अल्बर्ट आइंस्टाइन कैलकुलेट कि हुई पेपर ओपेनहाईमर को देते हुये कहते हैं,ये तुम्हारा हैं मेरा नही।वो पेपर लेकर वहाँ से चला जाता हैं।

वापस आते ही उसका एक कलिग साईंटिस्ट कहता हैं,टैलर गलत हैं।जब हम टैलर कि कैलकुलेशन को बरिखि से जाजते हैं,असलियत सामने आती हैं, बेकाबू न्यूकलियर रियेक्शन होने कि समभावना लघभग जिरो परसेंट हैं।ओपेनहाईमर बोले तो काम सुरु करो। इसके बाद सभी साईंटिस्ट अपने-अपने थियोरी के साथ काम करने लगे,ऐसे ही काम करते-करते तीन साल बित गये।बीच-बीच में छोट-छोटे धमाके कर के एक्शपेरिमेंट करते रहे।इस बीच हिटलर कि मौत हो जाती हैं,और जर्मनी जंग से पिछे हट जाता हैं।जपान अभी भी लड़ाई लड़ रहा हैं।

फायनली तीन साल बाद वो दिन आ गाया, जब असलियत में एटोमिक बम बनकर तैयार हो गया।और उस एटोमिक बम को फोर कर ऊसका टेस्टट किया जायेगा।फिर वो दिन भी आ गये,लेकिन टेस्ट के दिन तुफान और बारिश होने लगी,जिससे बम धमाके में दिक्कत हो सकती थी,सायद जोर का धमाका ना हो।ओपेनहाईमर बोलते हैं,अगर डेटोनेटर फायर किया औए तुफान कि वजह से धमाका नही हुआ तो दो साल से ईक्ठा किया हुआ प्लोटिनियम सब बरबाद हो जायेगा।

एक साईंटिस्ट कलिग कहता हैं,धमाका होगा मैं गैरेंटी देता हू होगा, वो ओपेनहाईमर से एक महिने का सैलरी दाव पे लगाता हैं,और हाथ मिलाकर कहेता हैं,धमाका होगा।उस दिन तुफान के साथ बहुत बारिस भी हो रही थी।कर्नल ग्रोव्स और ओपेनहाईमर एक घर के अंदर बैठ कर दोनो वापस में बात कर रहे हैं,कर्नल ग्रोव्स बोले तीन साल, चार हजार लोग और दो अरब डौलर अगर धमाका नही हुआ,हम दोनो कि कैरियर समझो खतम,ओपेनहाईमर बोले ऊम्मिद हैं,धमाका तीन किलो टन का होगा।

उससे कम का हुआ तो वो किसी काम का नही।कर्नल ग्रोव्स ओपेनहाईमर से पुछते हैं,वैसे फर्मि का क्या मतलब था,एटमोस फेयरिक के कंडिशन से,ओपेनहाईमर बोले एक पल ऐसा आया था हमे लगा एटोमिक डिवाईज में सुरु हुआ रियेक्शन थमेगा ही नही,और पुरी दुनिया को खाख कर देगा।कर्नल ग्रोव्स बोले तुम कहेना चाहते हो,अगर हमने वो वट्न दबा दिया तो पुरी खत्म हो सकती हैं,ओपेनहाईमर बोले पिछले तीन साल के रिसर्च में हमे ऐसा कोई सबूत नही मिला हैं।

ऐसा होने का चांसेस बहुत कम हैं,लगभग जिरो के समान एक थियोरी से हम क्या ही उम्मिद कर सकते हैं।बस एक घन्टा 45 मिनट में हमे पता चल जायेगा।फिर वो वक्त आ गया,डिटोनेटर का बटन दबाया गया।और तीन किलो टन के बराबर एक धमाका हुआ जिसकी ऊचाई लगभग तीस फिट ऊची थी। सब लोग देखकर हैरान हो गए।ऊसके बाद ओपेनहाईमर भी हैरान हो गये,क्योकि उम्मिद से ज्यादा बड़ा धमाका हुआ जिससे बहुत दुर तक जमीन भी कांप गई।


इसी के साथ एटोमिक बम का प्रोजेक्ट कामयाब हुआ,ओपेनहाईमर दुनिया के सबसे पहले एटोमिक बम (परमाणु बम) बनाने वाले इंसान बन गये।सभी लोग उन्हे बधाईया देने आये और सभी ने उन्हे हाथ मिलाकर मुबारक बाद दी।लेकिन ओपेनहाईमर इस कामयाबी से खुश नही थे।क्योकि उन्हे पता चल गया था,कि ये बम तबाही ला सकता हैं।यह बम जिस देश पर गिरेगा वहाँ लाखो लोग मारे जयेंगे।कर्नल ग्रोव्स जब ये बम ले जा रहे थे,तब ओपेनहाईमर बिल्कुल खुश नही थे।

कर्नल ग्रोव्स ओपेनहाईमर को आसवासन देते हुये कहते हैं,ये बम सिर्फ जपान को धमकाने के लिए लेकर जा रहे हैं।मैं पुरी कोसिस करुंगा कि इसका इसतेमाल करने कि नौवत ना आए।और वो बम लेकर वहाँ से चले जाते हैं। उसके कुछ समय बाद 6 अगस्त 1945 को हवाई जहाज केजरिये जापान के हिरोशिमा शहर पर एटम बम गिराया गया,जिसमे 1लाख 40 हजार लोग मारे गये,और उसके तीन दिन बाद नागासाकि शहर पर एटम बम फिर से गिराया जिसमे 75 से 80 हजार लोग मारे गये।

इससे ओपेनहाईमर बहुत निरास हो गये। लोगो के सामने खुश होने का दिखावा कर तो रहे थे। पर अंदर से उन्हे इस बात का मलाल था। कि उन्होने जो एटम बम बनाया, जिससे करीब 2 लाख 20 हजार लोग मारे गये। जिसका अब जाकर उन्हे अफसोस हो रहा था। कुछ समय बाद अमेरिका के रास्ट्रपति ओपेनहाईमर को अपने रास्ट्रभवन में मिलने के लिए बुलाते हैं। रास्ट्रपति बोले डॉक्टर ओपेनहाइमर मिलकर खुशि हुई, तो दुनिया का सबसे मसुहुर आदमी बनकर कैसा लग रहा हैं। ओपेनहाईमर बोले ये मेरे अकेले कि जित नही हैं,ये मेरे पुरे टिम के बदौलत समभव हुआ हैं।

रास्ट्रपति ओपेनहाईमर से पुछते हैं, क्या आप बता सकते हैं,कि सोबियत ये बम कब तक बना सकती हैं।ओपेनहाईमर बोले रुस के पास भी अच्छी फिजिस्यन हैं,ये बम बनाने के लिए वो दिन-रात एक कर देंगे। रास्ट्रपति बोले सुना हैं,कि आप लौस एलामोस आप छोड़ रहे हैं,उस जगह का हम क्या करेंगे।ओपेनहाईमर बोले वो वापस इंडियन को लौटा दिजिये।रास्ट्रपति बोले डॉक्टर ओपेनहाइमर रसियन के बारे में आप जो कहे रहे हैं,अगर वो सही निकला,तो हमे और लौस एलामोस बनाने होंगे,उसे ठ्प नही कर सकते।

ओपेनहाईमर बोले मिस्टर प्रसिडेंट मुझे लगता हैं,मेरे हाथ मासुमो के खुन से रंगे हैं।रास्ट्रपति बोले हिरोशिमा या नागासाकि के लोगो को ये बम किसने बनाया उससे उन्हे कोई फर्क परता हैं।इसे गिराने वाला उसका दुशमन हैं,जो मैं हू,हिरोशिमा के गुन्हेगार मैं हू।फिर ओपेनहाईमर वहाँ से चला जाता हैं। रास्ट्रपति बोले इनसे मेरी मुलाकात दुबारा मत करवाना।

दो साल बाद ओपेनहाईमर को ऐमिरल स्ट्रॉस से ने अपने घर पर बुलये।और एटोमिक ऐनर्जि इंस्टियुट का हेड ओपेनहाईमर को बनाया।उसके बाद वे दोनो एक साथ 1947 से 1954 तक एक साथ मिलकर इंस्टियुट को चलाया। उन सात सलो के बीच कई ऐसी घटनाए हुई। जैसे ओपेनहाईमर हाईड्रोजन बम बनाने के सख्त खिलाप हो गये। साथ हि वो पौलिटिस (राजनीती) भि करने लगे,जहाँ वो स्पिच में कहने लगे, अमेरिका और रुस एक दुसरे के जानी दुशमन बन चुके हैं।

जो कभी भी जंग लड़ सकते हैं। जिसमे एटोमिक बम का इसतेमाल होगा, जिसमे आम लोग मारे जायेंगे। सरकार को ये बात समझनी चाहिए। इसके बाद ओपेनहाईमर के कई दुशमन थे,जो इस स्पिच के बाद ओपेनहाईमर को फसाने कि सजिस रची गई।जहाँ ओपेनहाईमर को एक कौमनेस बताया गया और सोबियत का जासुस भी, नैशनल सियूक्रिटी के तहेत उन पर कारवाई बैठाई गई।


Oppenheimer Movie Story ईंट्रोगेशन रुम

ईंट्रोगेशन रुम जिसमे आठ सरकारी अफसर बैठे हुये हैं। जो ओपेनहाईमर को एक कौमनेस और सोबियत का जासुस होने के आधार पर पुछ-ताछ करेंगे। नैशनल सियूक्रिटी के तहेत उन पर कारवाई बैठाई गई। ओपेनहाईमर के खिलाप कई सबूत पेस किए गये,जो सारे सबूत झुठे थे, जिसमे बताया गया, ओपेनहाईमर कि पत्नी, उसकि पहली लवर, उसका भाई और उसकि मंगेतर के पिता और उसके कई दोस्त सभी कौमनेस पार्टि के सदस्य हैं। उसके भाई,दोस्त और कई लोगो को अमेरिका में ब्लैकलिस्ट भी कर दिया गया हैं।

और इन लोगो के साथ ओपेनहाईमर का उठ्ना बैठना हैं। जिससे ये साबित होता हैं,कि ओपेनहाईमर भी इन लोगो के साथ हैं। जो कि हमारे देश के नैशनल सियूक्रिटी के लिए खतरा हैं। ओपेनहाईमर अपनी सफाई में कहते हैं, मेरी पत्नी कौमनेस कि सद्स्य थी,दो सालो के लिए।अब नही हैं, ये बहुत साल पहले कि बात हैं। ओपेनहाईमर कि पत्नी को बुलाया जाता हैं। गवाही के लिए वो भी वही बात कहती हैं, ओपेनहाईमर ने कहा था।

फिर ओपेनहाईनर के कई दोस्तो को गवाही के लिए बुलाया जाता हैं।जो सब एटोमिक प्रोजेक्ट पर एक साथ काम कर रहे थे। वे सब लोग यही कहते हैं, ओपेनहाईमर एक ईमनदार और देश भक्त इंसान हैं। कर्नल ग्रोव्स भी आते हैं, गवाही देने वो भी यही कह्ते हैं,कि ओपेनहाईमर एक ईमनदार और देश भक्त इंसान हैं, इनसे हमारे देश के नैशनल सियूक्रिटी के लिए कोई खतरा नही हैं।फिर बौर्डन को गवाही के लिए बुलाया जाता हैं।

बौर्डन ही जो FBI को लेटर लिखकर सारे सबूत दिए थे। जिसका कारन ये था,कि एटोमिक प्रोजेक्ट पर काम करते समय बौर्डन हाईड्रोजन बम बनाने कि थियोरी बनाई थी। उसने ओपेनहाईमर से कहा था, हाईड्रोजन बम बनाने में उसका साथ दे,उस वक्त ओपेनहाईमर हाँ कहा था। लेकिन बाद में एटोमिक बम से हिरोशिमा और नागासाकि में बहुत सारे लोग मारे गये। इसलिए ओपेनहाईमर बाद में हाईड्रोजन बम बनाने के लिए मना कर दिया था।

हाईड्रोजन बम बनाने का नजरिया उनका बदल गाया, ओपेनहाईमर का मानना था, एक एटोमिक बम बना चुके हैं, जिससे बहुत सारे लोग मारे गये। फिर से ये हाईड्रोजन बम इससे पुरे मानवता को खतरा हैं। बौर्डन ओपेनहाईमर के खिलाप गवाही देता हैं। वैसे उस ईंट्रोगेशन रुम जितने भी अफसर थे, सब ओपेनहाईमर को फसाने के लिये ही बैठे थे।

वो सारे लोग लुविस स्ट्रॉस के कहने पर ही पुछ-ताछ कर रहे थे। फिर वे सारे अफसर ओपेनहाईमर को दोशि करार कर देते हैं, और कहते हैं,आपकी सियूक्रिटी क्रिलियंस के अपिल को रद करते हुये, आपकी पुरी रिपोर्ट मिस्टर एवेंस के असहमती के साथ कुछ ही दिनो में AEC को भेज दि जायेगी।


फिर कुछ समय बाद यह मामला AEC कमिटी के द्वारा जांच कि जाती हैं। फिर से एक भवन में AEC कमिटी द्वारा सभा बुलाई जाती हैं, जहाँ पर लुविस स्ट्रॉस के साथ सभी गवाहो बुलाया जात हैं। सभा में फिर से पुछ-ताछ होती हैं। डॉक्टर हिल को गवाही के लिये बुलाया जाता हैं। डॉक्टर हिल वही इंसान हैं,जिसको लुविस स्ट्रॉस मोहरा बनाकर ओपेहाईमर के खिलाप साजिस कि थी। डॉक्टर हिल बयान देते हुये कहते हैं।

मुझे लुविस स्ट्रॉस के बारे बयान देने के लिये कहा गया हैं, एक ऐसा इंसान जो सालो से सरकार में कई हाई पोस्ट पर काम कर चुका हैं। जो वाकही ईमनादारी और अपनी अकलमन्दी के लिए मसुहुर हैं। मैं जो कहे रहा हु य्ह मेरी राय हैं। मैंने जो कहा ये समझना आसान हैं, कि हमारे देश के ज्यादातर साईंटिस्ट लुविस स्ट्रॉस को पुरी तरह सरकार में नही चाहते हैं। क्योकि लुविस स्ट्रॉस ने निजि रंजिस के कारन डॉक्टर ओपेनहाईमर के खिलाप साजिस रची।

डॉक्टर ओपेनहाईमर केस सुरु करने के पिछे और इसे यहा तक पहुचाने के पिछे असली वजह लुविस स्ट्रॉस की दुशमनी हैं। ओपेनहाईमर ने आइसोटोस कि सिपमेंट नॉर्वे भेजने के मुद्दे पर लुविस स्ट्रॉस कि राय ठुकराई थी। लुविस स्ट्रॉस सबके सामने हुई अपनी को बेयज्जीति कभी भुल नही पाए। इनके बीच हुई एक और बहस की वजह थी, हाईड्रोजन बम देश के सुरक्षा में क्या योगदान दे सकता हैं।

इसे लेकर दोनो कि राय अलग थी,और AEC के बोर्ड मिटिंग में लुविस स्ट्रॉस का कहना था, कि दुशमन आइसोटोस से एटोमिक बम बना सकते हैं। इस बात पर ओपेनहाईमर ने लुविस स्ट्रॉस का मजाक बनाया था। लुविस स्ट्रॉस इस बेय्ज्जीती भी नही भुले थे। इस सब के कारन लुविस स्ट्रॉस ओपेनहाईमर के असर को ख्त्म करने के लिये पर्सनल सियूक्र्टी सिसटम का भी सहारा लिया। लुविस स्ट्रॉस ने कुछ ऐसे महत्व कांसि लोगो को ढुंढने में कामयाब रहे।

जो ओपेनहाईमर के फैसले से सहमत नही थे, और सरकार में उनके बढते रुदवे से भी जलते थे। इस बयान को सुनने के बाद AEC कमिटी ने डॉक्टर ओपेनहाईमर को सारे इलजाम से मुक्त कर दिया। और उनके सियूक्रिटी क्रिलियंस कि अपिल को मंजुरी दे दी। जससे उनका बैंक बैलेंस, सरकारी घर, और प्रोपटी उन्हे वापस मिल गई।कुछ सालो बाद डॉक्टर ओपेनहाईमर के लिए सरकार ने दावत रखी गई, जिसमे उन्हे मेडेल दिये गये, बधाईया भी दी। उसमे उसके सारे दोस्त भी आये, जो उनके साथ ईमानदार थे।

और वो भी लोग आये, जो उनके खिलाप बयान दिया था, वो भी ओपेनहाईमर से हाथ मिलाकार उन्हे बधाईया दी। डॉक्टर ओपेनहाईमर अपनी पुराने यादो में जाते हैं। 1947 में जब वे लुविस स्ट्रॉस के घर के बाहर तालाब के पास अल्बर्ट आइंस्टाइन से जब दोनो अकेले में बात कर रहे थे। तब अल्बर्ट आइंस्टाइन ओपेनहाईमर से पहले ही यह बात कही थी, एक दिन ऐसा आयेगा। सब लोग तुम्हे बुलायेंगे और मेडेल मुबारक बाद भी देंगे।

तब ओपेनहाईमर ने अल्बर्ट आइंस्टाइन से यह बात पुछते है, कि मैं जब टैलर कि वह कैलकुलेशन पेपर आपके पास लाया था। हमे लगा था, कि हम ऐसा चैन रियेक्शन सुरु करेंगे जो पुरी दुनिया को खत्म कर देगा। अल्बर्ट आइंस्टाइन कहते हैं, मुझे अच्छी तरह से याद हैं। लेकिन क्या फायदा, ओपेनहाईमर कहते हैं, ऐसा लगता हैं, हम सही थे। उसी के साथ दिखाया जाता हैं, कि बहुत सारे न्यूकिलियर मिसाईल हैं, जो आसमान में छोरे जा रहे हैं,और उसके साथ पुरी दुनिया खत्म हो रही हैं। इसी के साथ कहाँनी यही पर समाप्त होती हैं। The End