Trial Period Review hindi | Trial Period Movie Review In Hindi

(Trial Period Review Hindi) ट्रायल पीरियड एक ऐसे बच्चे की कहाँनी हैं। जो मम्मी के प्यार और जिम्मेदारी के बोझ तले दबा हुआ हैं।उसे जरूरत हैं,एक ऐसे पापा की जो सुपरहीरो की तरह आकर एक एक एक बार में उसकी सारी प्रॉब्लम को सॉल्व कर दे। पर क्या उसे नए पापा मिलते हैं, और क्या उसकी मम्मी को नया प्यार मिलता हैं।

रिश्ते खून से ही जुड़े हों यह जरूरी नही हैं। फिल्म ‘ट्रायल पीरियड’ आधुनिक परिवारों के प्रेम और जटिलताओं की कहाँनी हैं। जिसमें दिखाया गया हैं, कि खून के रिश्ते से ज्यादा महत्वपूर्ण भावनात्मक रिश्ते भी होते हैं। इसके बावजूद जब एक दूसरे से विपरीत स्वभाव वाले दो लोग जब एक दूसरे से टकराते हैं। तो उनके बीच गहरे बंधन कैसे बन जाते हैं। यही इस Trial Period Review Hindi का मूल सार हैं।

एक बच्चे की जिंदगी में मम्मी और पापा दोनों ही कितने जरूरी हैं। कितना मुश्किल होता हैं। एक सिंगल मां होना, कैसे आप घर और बाहर दोनों की जिम्मेदारी संभालते संभालते छोटी-छोटी खुशियां भूल जाते हैं। अपने बच्चों का मन टटोलना भूल जाते हैं। ऐसे कई सवालों से जूझती हैं। अलेया सेन की यह फिल्म “ट्रायल पीरियड”

Trial Period Movie Trailer

यहाँ पर आप Trial Period की Trailer को online देख सकते हैं।

(Trial Period Review Hindi) ट्रायल पीरियड फिल्म भी ऐसी ही एक दिल को छू लेने वाली कहानी हैं। एक मां है,ऐना (जेलेनिया देशमुख) जो तलाकशुदा हैं,और आत्मनिर्भर महिला हैं। उसके दिन की शुरुआत अपने बच्चे रोमी (जिदान ब्रेज) से होती हैं। और खत्म भी उसी पर होती हैं।

टिम्मी शर्मा (शक्ति कपूर) और उसकी पत्नी (शीबा चड्ढा) घर के बगल में रहते हैं, जो अक्सर ऐना की हेल्प करते हैं।और रोमी की बेबी सिटिंग भी करते हैं। लेकिन बच्चे को पिता की कमी खलती हैं। क्योंकि मां उसके लिए सब कुछ करती हैं। पर इस बीच उसकी दोस्त बनना भूल जाती हैं।

Trial Period Movie Ki Kahani

कहाँनी में एक अकेली मां हैं। उसका एक बेटा हैं। किसी भी बच्चे की परवरिश में एक मां-बाप का बहुत ही बड़ा हाथ होता हैं। एक बच्चे के लिए मां का प्यार ममता का सागर होता हैं, तो पिता का प्यार एक आदर्श और सम्मान से कम नहीं होता हैं। भले ही एक मां अपने बच्चे की परवरिश में कोई कमी छोड़े, लेकिन एक बच्चे के लिए मां और बाप दोनों का प्यार बहुत जरूरी होता हैं। रोमी के स्कूल के बच्चे जब अपने- अपने पिता की बखान करते हैं। तो रोमी को भी एक पिता की कमी का अहसास होता हैं।

तब वह घर आकर अपनी मां से अपने पिता के बारे में पूछता हैं, तो उसकी मां उसे घुमा फिराकर जवाब देती हैं।और बात को वही टाल देती हैं। रोमी अपनी जिद पर अड़ा हुआ हैं, कि उसको नया पापा चाहिए। एक दिन रोमी जब टीवी देख रहा होता हैं, तो उसमे एक समान का विज्ञापन चल रहा था, ये समान आप 30 दिनो के “ट्रायल पीरियड” पर ले कर जाये। पसंद आये तो ठीक नही तो 30 दिनो मे वापस कर सकते हैं।

इस दौरान रोमी को यह आइडिया मिलता हैं, कि वो “ट्रायल पीरियड” पर अपने लिए पापा ऑर्डर कर सकता है। यानी अगर वह उसे बाद में पसंद नहीं करे तो वापस किया जा सकता हैं।रोमी भी अपनी मां से कहता हैं, मुझे भी 30 दिन के लिए (Trial Period) ट्रायल पीरियड पर नया पापा ला कर दो। इस तरह के बात सुनकर सभी हैरान हो गये। इस तरह का सवाल सुनकर सबका चौंकना स्वाभाविक है। 

ऐना भी चौंकती है, कोई सामान थोड़े ही हैं। एक इंसान हैं, जिसको ट्रायल पीरियड पर घर कैसे लाया जा सकता हैं। लेकिन बेटे की जिद के आगे ऐना के मन में एक विचार आता हैं।और अपने बेटे के लिए नए पिता की तलाश करती है। इसके लिए उसे बहुत संघर्ष करना पड़ता हैं, क्योंकि लोगों को यह सुनकर बड़ा अटपटा सा लगता हैं, कि 30 दिन के ट्रायल पीरियड पर पिता बनाना है।

लेकिन ऐना हार नहीं मानती है। उसकी तलाश पूरी होती हैं। उज्जैन का एक दयालु आदमी है, जो नौकरी की तलाश में दिल्ली आया हैं। ऐना दिल्‍ली की शहरी सोच वाली लड़की है। उसका सामना उज्जैन के एक देसी, हिंदी बोलने वाले, इतिहास के शिक्षक, प्रजापति द्विवेदी उर्फ पीडी (मानव कौल) से हाता हैं।और वो किराए का पिता बनने के लिए राजि हो जाता हैं, क्योकि उसके पास कोई नौकरी नही होती हैं। वो बेरोजगार हैं, इसके लिए उसे न चाह कर भी राजि होना पड़ता हैं।

लेकिन ऐना पीडी के सामने एक शर्त रखती हैं, कि रोमी के साथ उसे ऐसे पेश आना हैं, ताकि उसे पिता शब्द से नफरत हो जाए। प्रजापति द्विवेदी जिसे लोग प्यार से पीडी कहते हैं। वो ऐना की शर्तों पर आ तो जाता हैं, लेकिन इन 30 दिनों में पीडी न सिर्फ रोमी के बहुत करीब आ जाता है, बल्कि ऐना के प्रति भी उसके दिल में सहानुभूति पैदा हो जाती है। कहानी में अचानक नया मोड़ तब आता हैं। जब ऐना के माता- पिता अचानक उसके घर दिल्ली आ जाते हैं।

वो तो ये देखर हैरान हो जाते हैं,कि 30 दिनो के लिए ट्रायल पीरियड पर पिता को लाया गया हैं। उनको तो यह बात हजम ही नही हो रही थी।इसके लिए वो मान ही नही रहे थे, लेकिन रोमी के खातिर उन्हे यह बात माननी पड़ती हैं। फिर सब एक साथ रहने लगते हैं।कैसे मिलनसार स्‍वभाव का पीडी, 6 साल के रोमी को अपने हक के लिए खड़े होने की सीख देता हैं। अब कहानी में एक सुंदर और अपरंपरागत परिवार आकार लेता है।

लेकिन ये दोनों अलग-अलग बैकग्राउंड से हैं। और इसलिए टकराव भी शुरू होता हैं। लेकिन क्या यह सब बस ‘ट्रायल पीरियड’ तक के लिए हैं, या फिर रिश्‍तों की यह अनोखी नोक झोक कोई और मोड़ लेगी। ऐना पीडी के शुद्ध हिंदी के उच्चारण से इतनी प्रभावित होती हैं। कि उसे गुड मॉर्निंग कहने के बजाय सुप्रभात कहती हैं। कहाँनी में इस तरह की बात भले ही छोटी- छोटी लगती हैं, इस तरह चीजें ही अपना प्रभाव छोड़ती हैं।

Trial Period Movie Cast Hindi

  • जेनेलिया देश्मुख: मुख्य भुमिका (महिला)
  • मानव कौल: मुख्य भुमिका (पुरुष)
  • शक्ति कपुर
  • गजराव राव
  • शीबा चड्डा
  • स्वरूपा घोष
  • बरूण चन्दा और जिदान ब्राज
  • लेखक: अलेया सेन
  • निर्देशक: अलेया सेन
  • निर्माता: हेमंत भंडारी,ज्योति देशपांडे,अमित रवींद्रनाथ शर्मा और अलेया सेन
  • रिलिज: 21 जुलाई
  • ओटीटी: जियो सिनेमा
  • इस फिल्म को आप देखना चाहते हैं। यहाँ देखे...
Trial Period Review Hindi

(Trial Period Review Hindi) फिल्म की कहानी इस बारे में भी हैं, कि रिश्ते खून से ही जुड़े हों यह जरूरी नही हैं। फिल्म ‘ट्रायल पीरियड’ आधुनिक परिवारों के प्रेम और जटिलताओं की कहाँनी हैं। जिसमें दिखाया गया हैं, कि खून के रिश्ते से ज्यादा महत्वपूर्ण भावनात्मक रिश्ते भी होते हैं।

इस फिल्म में दिखाई गई कहानी कुछ अलग और हटके एक परिवार की हैं। जो परंपराओं के समीकरण से अलग कुछ नया कर रहे हैं। यह फिल्‍म यह भी दिखाती हैं, कि सिंगल मां के लिए अक्सर बच्चे को पालने और समाज में मिलकर रहना, अपने सम्मान और इज्ज्त पाने में कितनी मशक्‍कत करनी पड़ती है।

(Trial Period Review Hindi) इस ‘ट्रायल पीरियड’ फिल्म की सबसे खास बात है। कि इसमे जेनेलिया देशमुख एक सिंगल मां की बजाय वह प्रजापति द्विवेदी की भूमिका निभा रहे मानव कौल की प्रेमिका ज्यादा लगती हैं। इस भूमिका में वह काफी आकर्षक लगी। लेकिन मां- बेटे के बीच जिस तरह से भावनात्मक दृश्य उभर कर आने चाहिए वह नहीं दिखे।

इस फिल्म के बाकी कलाकारों शक्ति कपूर, शीबा चड्ढा, गजराव राव,बरुण चंदा,स्वरूपा घोष,और जिदान ब्राज का का परफॉर्मेंस सामान्य रहा। गजराज राव और शीबा चड्ढा को फिल्म में थोड़ा सा और स्पेस मिलना चाहिए था।अलेया सेन शर्मा के डायरेक्‍शन में बनी यह फिल्‍म प्रेडिक्‍टेबल और कबिले तरिफ हैं। इस फिल्म को देखते हुए।आपको यह बात आसानी से पता चल जायेगा, कि आगे क्‍या होने वाला है।

करीब 2 घंटे और 5 मिनट के रनटाइम में स्‍क्रीनप्‍ले बीच-बिच में स्‍लो लगने लगती हैं। हालांकि, राइटर और डायरेक्‍टर के तौर पर अलेया ने एक दिल छू लेने वाली और प्यार भरी दिल को छू लेने वाली कहानी तैयार की है। इस कारण उनकी काबिले तारिफ होनी चाहिए। इस फिल्‍म में जिस तरह से किरदारों को पॉजिटिव और अच्छी तरह से फिल्म में दिखाया गया हैं, यह कहानी को बहुत सुंदर बनाती हैं।

Trial Period Movie क्यो देखे

 इस फिल्म की सबसे बड़ी खासियत फिल्म का बैकग्राउंड स्कोर रहा हैं, जिसमे अनुपम रॉय की मेहनत नजर आती हैं। फिल्म के सिनेमैटोग्राफर मनोज कुमार खतोई ने फिल्म के सीन को बहुत खूबसूरती से फिल्माए हैं। फिल्म देखने के बाद एक ताजगी महसूस होती है। Trial Period Movie ‘ट्रायल पीरियड’ एक पारिवारिक मनोरंजक फिल्म हैं। जिसमें हल्की-फुल्की कॉमेडी है, कुछ इमोशनल कर देने वाले सीन हैं, खासकर किरदारों के बीच की केमिस्‍ट्री अच्‍छी लगती हैं। कुल मिलाकर इसे एक बार तो जरूर देखा जा सकता हैं।

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